टेटनस क्या है ,इसका इलाज और बचाव ( Know about Tetnus)

 टिटनस (Tetanus in Hindi) एक खतरनाक बीमारी मानी जाती है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के कारण उत्पन्न होता है। टिटनेस जिस बैक्टीरिया से उत्पन्न होता है उस बैक्ट्रिया का नाम है क्लॉस्ट्रीडियम टिटानी (clostridium tetani)। टिटनेस बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश करने के बाद एक खतरनाक जहर पैदा करता है जो मुख्य रूप से हमारे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। जिससे हमारे मांसपेशियों में संकुचन पैदा होता है यह संकुचन मुख्य रूप से हमारे जबङे और गर्दन की मांसपेशियों में ज्यादा देखी जाती है। क्लॉस्ट्रीडियम टिटानी आपके सांस लेने में अवरोध पैदा करता है जिसके कारण आप सही तरीके से सांस नहीं ले पाते हैं। टेटनस को आमतौर पर “लॉकजाॅ” के नाम से भी जाना जाता है।



टिटनेस (Tetanus in Hindi) का कोई भी उपचार मौजूद नहीं है। इसका उपचार मुख्य रूप से टिटनेस के विषाक्तता को कम करने तथा उसके लक्षणों पर निर्भर करता है। टिटनेस का टीका (vaccine) मौजूद है। अगर आप इसका टीका समय पर ले चुके हैं तो आप को डरने की आवश्यकता नहीं है।


विकसित एवं विकासशील देशों में टिटनेस के मामले दुर्लभ पाए गए हैं। लेकिन यह बीमारी उन लोगों के लिए खतरा बनी हुई है, जो अपना और अपने बच्चों का टीकाकरण समय पर नहीं करवाते है। जिसकी संख्या विकासशील देशों में ज्यादा देखी गई है।


टेटनेस होने का मुख्य कारण : Causes of tetanus.


टिटनेस मुख्य रूप से मिट्टी, धूल, जानवरों के मल और जंग लगे हुए लोहे में पाए जाने वाले बैक्टीरिया क्लॉस्ट्रीडियम टेटानी से बने विष से उत्पन्न होता है। जब किसी व्यक्ति को गहरा जख्म या घव होता है तो उसके द्वारा बैक्टीरिया गहरे मांस में प्रवेश करता है तो वह और बैक्टीरिया में विकसित हो जाते हैं। जो एक शक्तिशाली विष टेटानोस्पासमिन उत्पादन करते हैं। यह विष उन नसों को प्रभावित करता है जो आपकी मांसपेशियों को नियंत्रित करती है। चेतना शिविर आपके मांसपेशियों में अकड़न और एठन पैदा करता है।


टिटनेस के लक्षण : Tetanus Symptoms in Hindi


यह एक लाइलाज बीमारी मानी जाती है। इसलिए इस संक्रमण का टीकाकरण समय पर लगवाना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।


टिटनेस के लक्षण आमतौर पर प्रारंभिक संक्रमण के 7 से 10 दिनों के बाद सामने आते हैं हालांकि इसका संक्रमण 4 दिनों से लेकर लगभग 3 सप्ताह तक भी हो सकता है और कुछ मामलों में इनके लक्षण प्रकट होने में महीनों लग सकते हैं।


टिटनेस का बैक्ट्रिया मुख्य रूप से केंद्रीय स्नायुतंत्र को प्रभावित करता है। जिसके कारण मांसपेशियों में इसके लक्षण पहले प्रकट होते हैं मांसपेशियों के लक्षण में ऐठन और कठोरता शामिल है। अकड़न आमतौर पर चबाने वाली मांसपेशियों से शुरू होती है जिसके कारण इसे लॉकजाॅ भी कहा जाता है।


मांसपेशियों में ऐंठन पूरे शरीर से होते हुए गले और गर्दन तक पहुंच जाती है, जिससे पानी पीने तथा निगलने में तकलीफ होने लगती है मरीजों को अक्सर गले गर्दन तथा चेहरे की मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होती है।


सांस लेने में कठिनाई भी टेक्नॉस का एक प्रमुख लक्षण माना जा सकता है। ऐसा गर्दन और छाती की मांसपेशियों मैं कठोरता आ जाने से भी हो सकता है कुछ लोगों में पेट और पूरे शरीर की मांसपेशियां भी प्रभावित होती है।


कुछ मामलों में रीढ़ को पीछे की ओर झुक जाना भी देखा गया है ऐसा इसलिए देखा गया है क्योंकि पीठ की मांसपेशियां प्रभावित होती है। यह लक्षण मुख्य रूप से बच्चों में सामान्य देखा गया है। अधिकांश व्यक्तियों में निम्नलिखित लक्षण भी देखे जाते हैं।


बुखार (fever)


सर दर्द (Headache)


डायरिया (diarrhoea)


मल में खून आना (bloody stool)


गले में खराश (sore throat)


पसीना आना (sweating)


धड़कन का तेज होना (heartbeat increase)


उपचार : Treatment of tetanus in Hindi


टिटनेस (Tetanus in Hindi) का कोई उपचार मौजूद नहीं है हालांकि टिटनेस का टीका मौजूद है जो टिटनस जैसे गंभीर संक्रमण को होने से रोकता है अगर आप टिटनस का टीकाकरण समय पर करवा चुके हैं तो आप को डरने की आवश्यकता नहीं है। इसका उपचार मुख्य रूप से टिटनेस के विषाक्तता को कम करने तथा उसके लक्षणों पर निर्भर करता है। अगर आपने अभी तक टिटनस का बूस्टर नहीं लिया है तो आप तुरंत अपनी नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।


अगर आपको जंग खाए हुए लोहे या मीठी के संपर्क से घव, चोट या छिल गया हो।


ऐसा जख्म या जला जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता हो और जिसमें 6 घंटे की देरी हो चुकी हो।


ऐसा जख्म या जला हुआ जिसमें ऊपरी उसको को हटाया जा चुका हो।


गंभीर फ्रैक्चर जिसमें हड्डियों तक संक्रमण पहुंच चुका हो।


ऊपर दिए गए सभी संक्रमण हो या गांव में मरीज को जितनी जल्दी हो सके टिटनस इम्यूनोग्लोबुलीन (TIG) लगवाना चाहिए। भले ही उसे टिटनस का टीका लगाया गया हो टिटनस इम्यूनोग्लोबुलीन में एंटीबॉडीज होते हैं जो क्लॉस्ट्रीडियम टेटनी को मार देता है और टेटनस के खिलाफ तत्काल अल्पकालीन सुरक्षा प्रदान करता है।


गिलोय के चमत्कारी फायदे!

 आयुर्वेद में कड़वे स्वाद वाली गिलोय को कई बीमारियों के इलाज में कारगर जड़ी-बूटी माना गया है। आमतौर पर गिलोय को जूस, काढ़ा, पावडर या गिलोय वटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।



बढ़ाए रोग प्रतिरोधक क्षमता


इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट तत्व शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल देते हैं, खून को साफ करते हैं और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। गिलोय की 4-6 इंच लंबी डंडी को छील लें और आधा पानी मिलाकर मिक्सी में पीस लें। छान कर एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं।


सर्दी-जुकाम-बुखार भगाए


इस मौसम में होने वाले डेंगू, मलेरिया जैसे बुखार के कारण ब्लड प्लेटलेट्स कम होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर गिलोय का सेवन मददगार है। एक कप पानी में 4-5 इंच लंबी गिलोय की डंडी कूट कर डालें। पानी आधा रह जाने पर बने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है। प्लेटलेट्स कम होने पर गिलोय और ऐलोवेरा के रस को मिलाकर सेवन करना असरदार है।


सर्दी-जुकाम में भी गिलोय का काढ़ा पीने से आराम मिलता है। 6 इंच लंबी गिलोय की डंडी पीस कर पानी मिलाकर काढ़ा बनाएं। पिसी काली मिर्च डाल कर पिएं।


टाइप 2 डायबिटीज में असरदार


हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट होने के कारण गिलोय ब्लड शुगर लेवल को कम करती है। लौंग, अदरक, तुलसी मिलाकर बने गिलोय का काढ़ा पिएं।


अस्थमा में दे आराम


आजकल के बदलते मौसम और सर्दियों में अस्थमा के मरीजों के लिए गिलोय फायदेमंद है। नियमित रूप से गिलोय की डंडी चबाएं या उसका जूस पिएं।


आर्थराइटिस के दर्द में राहत


गिलोय का पावडर दूध के साथ 2-3 बार सेवन करने से गठिया में लाभ मिलता है। 1 चम्मच गिलोय का रस और त्रिफला को आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पिएं। रस में अदरक का रस भी मिला सकते हैं। एक चम्मच गिलोय के चूर्ण को घी के साथ लें। अरंडी या कैस्टर ऑयल के साथ मिलाकर जोड़ों पर लगाएं।


पाचन समस्याओं को करे दूर


इसके नियमित सेवन से पाचन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। कब्ज जैसी पेट की बीमारी में राहत मिलती है। कब्ज होने पर एक-चौथाई कप गिलोय के रस में गुड़ मिलाकर पिएं।


एनिमिया में प्रभावी


गिलोय खून की कमी के कारण लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ाने में सहायक है। जिससे एनीमिया और उससे होने वाली थकान-कमजोरी दूर होती है। रोजाना सुबह-शाम गिलोय का रस घी, मिश्री या शहद में मिलाकर लें।


पीलिया होने पर एक चम्मच गिलोय का चूर्ण, काली मिर्च या त्रिफला के एक चम्मच चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर चाटना लाभकारी है। गिलोय के एक चम्मच ताजा रस को एक गिलास लस्सी में मिलाकर पिएं।


कम करती है तनाव


गिलोय एस्ट्रोजन का काम करती है और मानसिक तनाव या एंग्जाइटी के स्तर को कम करती है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली दुरुस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।


मोटापा करे नियंत्रित


गिलोय शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है और शरीर में अतिरिक्त फैट कम होता है। एक चम्मच गिलोय और त्रिफला पावडर सुबह-शाम शहद के साथ लें। दिन में एक बार गिलोय, हरड़, बहेड़, शिलाजीत और आंवला मिलाकर काढ़ा पिएं।


त्वचा-बालों को रखे स्वस्थ


एंटी एजिंग गुणों के कारण गिलोय के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है, दाग-धब्बे दूर होते हैं। गिलोय की पत्तियों को पीस कर बने पेस्ट में अरंडी या नीम का थोड़ा-सा तेल गर्म करके मिलाएं। गिलोय का तेल थोड़े-से दूध में मिलाकर हल्का गर्म करें। इसे फटी त्वचा पर लगाने से त्वचा कोमल और साफ हो जाती है। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं। बालों में रुसी, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की समस्याएं दूर होती हैं।

पतंजलि व्हीट ग्रास पाउडर के फायदे और नुकसान !


 पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर PATANJALI WHEAT GRASS POWDER In Hindi शुद्ध गेहूं के जवारों से मिलकर बनाया गया एक आयुर्वेदिक पाउडर है, इस दवा में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर में मौजूद एनीमिया, पेट रोग, सर्दी जुखाम, कैंसर, थायराइड व सेक्स संबंधी रोगों के लिए यह अनमोल औषधि है | यदि आप भी कुछ इसी प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त है, तो आपको भी इस दवा का सेवन जरुर करना चाहिए | 


विषय सूची 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर में मिलाई जाने वाली जड़ी-बूटी : 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर PATANJALI WHEAT GRASS POWDER In Hindi के लाभ : 


एनीमिया रोग को ख़त्म करता है 


लिवर रोग में लाभकारी है यह पाउडर 


त्वचा के देखभाल में सहायक है 


भूख बढ़ाने में लाभकारी है पाउडर 


यौन समस्या को ख़त्म करता है 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर का सेवन तरीका 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर में मिलाई जाने वाली जड़ी-बूटी : 


गेहूं के जवारे 


दालचीनी 


देवदारु 


मुलेठी 


अश्वगंधा 


शतावर 


नागकेशर 


जैसी जड़ी-बूटियों के द्वारा इस दवा का निर्माण किया जाता है, इन औषधियों में प्रचुर मात्रा में आयरन, फास्फोरस, पोटेशियम, जिंक, कैरोटीन, फोलेट, सोडियम व फाइबर जैसे तत्व पाए जाते है | जो शरीर को स्वस्थ रखने में लाभदायक साबित होते है | 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर PATANJALI WHEAT GRASS POWDER IN HINDI के लाभ : 


एनीमिया रोग को ख़त्म करता है 


एनीमिया से ग्रस्त मरीज को नियमित इस पाउडर का सेवन करना चाहिए, इस दवा में पाया जाने वाला क्लोरोफिल तत्व मरीज के शरीर में रक्त की कमी को दूर करके मरीज को स्वस्थ बनाता है | गर्भावस्था के बाद महिलाये भी इस दवा का सेवन कर सकती है | 


लिवर रोग में लाभकारी है यह पाउडर 


लिवर से जुड़े रोगों में इस पाउडर का सेवन अति लाभकारी माना जाता है, यह दवा लिवर में मौजूद गंदगी बहुत ही आसानी से ख़त्म करके लिवर को स्वस्थ बनाती है, बच्चों को यह दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर ले | 


त्वचा के देखभाल में सहायक है 


आज कल बढती तेज धुप के कारण कई महिला व पुरुष की त्वचा काली पड़ने लगती है, जिसके कारण उनको कई प्रकार की दिक्कत का सामना करना पड़ता है, पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर सनबर्न जैसी समस्या को बहुत ही आसानी से खत्म करने में मदद करता है | 


भूख बढ़ाने में लाभकारी है पाउडर 


भूख न लगने की समस्या आज कल सभी वर्ग के लोगों में देखी जाती है, इस परेशानी के कारण व्यक्ति एनीमिया व कमजोरी जैसी बीमारी से भी ग्रस्त हो सकता है, इस पाउडर को रोजाना सुबह शाम पानी के घोल कर पीने से मरीज की भूख की समस्या पूर्णरूप से खत्म हो जाती है | 


यौन समस्या को ख़त्म करता है 


यह दवा यौन समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के लिए भी लाभकारी साबित होती है, क्योंकि इस दवा में पाए जाने वाले तत्व शीघ्रपतन, यौन अक्षमता व शुक्राणु को बढ़ाने का काम करती है | 


पंतजलि गेहूं जवारा पाउडर का सेवन तरीका 


आप इस पाउडर का सेवन रोजाना सुबह शाम पानी व दूध में मिलाकर भी कर सकते है, लेकिन आपको इस दवा का सेवन पैक पर दी हुई सावधानी के अनुसार व डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में इस दवा का सेवन स्वास्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है |

कोरोना जैसे वायरस चीन से ही क्यो फैलते है।




 इस समय कोरोणा वायरस काफी चर्चा में है, इजैसे वायरससका मुख्य केंद्र चीन है। चीन के आलावा अठारह और भी देश इस वायरस की चपेट में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक आपातकाल की घोषणा की है। कोरोना वायरस का अभी तक कोई भी कारगर इलाज नहीं है। इसका अभी तक कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है। यह एक नए प्रकार की बीमारी है, जो पहली बार चीन के वुहान शहर में पाया गया है। इससे चीन में 200 से अधिक लोगों की जाने जा चुकी है, और 1000 से अधिक लोग पीड़ित है। इस वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कई देशों की सरकार ने अपने नागरिकों को चीन ना जाने की सलाह दी है

चीन के कई शहरों में आपातकाल जैसी स्थिति है।

अब सवाल उठता है कि आखिर इस तरह के खतरनाक वायरस चीन से ही क्यो फैलते है।

ज्ञात हो कि सार्स वायरस, H1N1 और बर्डफ्लू जैसी महामारी चीन से ही फैली थी। इससे कई लोगो की जाने गई थी।

और भी कई तरह के वायरस फैले इन सबका सम्बद्ध कहीं न कहीं चीन से ही रहा है, आखिर क्या है, इसकी वजह इसके बारे में विस्तृत से जानते है।

कोरोना जैसे वायरस फैलने की वजह?

सबसे पहले कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर के सबसे बड़ा मीट बाज़ार से फैला है। इस बाज़ार में हरेक तरह के जंगली जीवजंतु जैसे, सांप, छिपकली, सूअर, बंदर, कुत्ते और चमगादड़ इत्यादि के मांस मिलते है। चीन के लोग चमगादड़ का सूप बड़े चाव से पीते है। कोरोंना वायरस जानवरो में पाए जाने वाला एक वायरस है, जो मनुष्यो में जानवरों के मांस खाने से फैला है। चीन के लोग मांसाहारी भोजन ज़्यादा पसंद करते है, जो इस तरह के वायरस को फैलने का एक ये भी कारण हो सकता है।

कोरोणा वायरस के लक्षण क्या है

इस वायरस से संक्रमित लोगो को जुकाम, सांस लेने में समस्या, बुखार और फेफड़े सम्बंधित समस्याएँ होने लगती है।

कोरोना वायरस से बचाव के उपाय।

इस वायरस को पूरी तरह ठीक करने के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन कुछ सावधानी बरती जाए तो इससे बचा जा सकता है, जैसे साबुन से हाथ को धोना, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना, मास्क पहन कर रहना और संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना इत्यादि शामिल है। 

गोरा होने का घरेलू उपचार || Home remedy for fair skin




गोरा और सुंदर दिखना हर एक व्यक्ति का सपना होता है। सभी लोग चाहते है कि उनका रंग गोरा रहे और सुंदर दिखे, इसके लिए बाज़ार में उपलब्ध क्रीम और फेस वाश का प्रयोग करते है, जो महंगे होने के साथ स्किन के लिए भी काफी खतरनाक होता है, क्योंकि जितने भी क्रीम होते है उनमें ज्यदतर स्टेरॉइड का इस्तेमाल किया जाता है। जिसके कारण वह क्रीम बहुत ही जल्द असर दिखाती है और लोग गोरे होने लगते है। लेकिन इस तरह की क्रीम का ज़्यादा और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से कई तरह को समस्या उत्पन्न हो जाती है, जैसे स्किन सेंसेटिव हो जाना, स्किन लाल हो जाना और चेहरे बाल का उगना इत्यादि,

कहने का आशय यह है कि ये सब जितने भी तरह के क्रीम है, आपको कम समय के लिए फायदा तो दिखाती है, लेकिन कई सारे दुष्परिणाम छोड़ जाते है।

ये कुछ घरेलू नुस्खे कई जिसका इस्तेमाल कर के आप गोरे हो सकते है और किसी भी प्रकार का कोई नुकसान भी नहीं होता है और ये सस्ते भी होते है, साथ ही ये आपको आसानी से अपने किचन में मिल सकता है, तो अाइए जानते है, ये कुछ घरेलू उपाय...

1. टमाटर और नींबू का फेस पैक।

टमाटर के छिलके को हटाकर उसके अंदर जो पल्प होता है, उसमे थोड़ा-सा एक या दो बूंद नींबू का रस मिला लेे और इस फेस पैक को अपने चेहरे पर अप्लाई करे, सूखने के लिए आधे घंटे तक छोड़ दे उसके बाद धो लें, यह प्रक्रिया आपको सप्ताह में दो से तीन बार करनी है, आप देखेंगे आपका चेहरा पहले से गोरा और सुंदर हो जाएगा। स्किन में ग्लो आना शुरू हो जाएगा।

2.संतरे का छिलका।

संतरे का छिलका, हमारे फेस का लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर पाउडर बना ले और उसमे ब्राउन शुगर थोड़ा-सा एड कर ले, फिर गुलाब जल की सहायता से पेस्ट बना ले और उसे चेहरे पर लगा ले और एक घंटे के बाद धो ले, आपका चेहरा ग्लो करने लगेगा, इस तरह आप इसे भी सप्ताह में 2 से3 बार लगा सकते है।

3.चंदन का पाउडर

चंदन का पाउडर भी चेहरे के लिए काफी बढ़िया होता है। इसके लिए आधा चमच चंदन पाउडर में एक चुटकी हल्दी और 4से 5 बूंद बादाम का तेल मिक्स कर लेे और अपने चेहरे पर लगा ले और आधा घंटे के बाद धो ले, इससे आपके चेहरे के दाग़ धब्बे और डार्क सर्कल मिट जायेंगे और आपका चेहरा चमकने लगेगा। ये प्रक्रिया सप्ताह में दो बार करे।

4.बेसन और दही।

बेसन और दही का इस्तेमाल कर चेहरे का कालापन दूर किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले बेसन, दही और हल्दी का मिश्रण बना ले और चेहरे पर अप्लाई करे, इससे चेहरे की सारी गंदगी दूर हो जाती है और चेहरा चमकने लगता है। इसका आप इस्तेमाल कर के गोरा हो सकते है।

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धन्यवाद्। 

खांसी ठीक करने का घरेलू इलाज || Best home remedy For Cough

खांसी ( cough) एक सामान्य बीमारी है,जो किसी भी उम्र में ,किसी को भी हो सकती है। खांसी(Cough) वैसे तो किसी भी मौसम में हो सकता है,लेकिन सर्दी में ज्यादा होता है।खांसी(Cough) दो प्रकार के होते है,एक सूखी खांसी ( Cough)जिसमें  बलगम नहीं  निकलता है, और ज्यादा खांसने पर सीने में दर्द  और गले में दर्द इत्यादि हो सकता है। दूसरी होती वेट कोफ ,यानी बलगम वाली खांसी ,इसमें खांसने पर बलगम निकलता है,और जुकाम भी होता।इन सारी खांसी को ठीक करने के लिए आपको रामबाण घरेलू उपचार बताने जा रहे जिसके इस्तेमाल से आप बिना किसी दवा के ठीक हो सकते है।

ये कुछ निम्नलिखित उपचार है जिसका आप इस्तेमाल कर सकते है,इसका किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है-

. अगर आपको ज्यादा खांसी(Cough)होती है, यानी सुखी  खांसी(cough)है, तो हल्के गुनगुने दूध में थोड़ा सा हल्दी पाउडर मिला कर आप रात में पी सकते है, जिससे आपको खांसी( cough) से राहत मिल सकता है।

. हल्के गुनगुने पानी को धीरे धीरे पीने से भी खांसी(cough) में राहत मिलती है।

.अंवला के इस्तेमाल से भी खांसी में काफी राहत होता है,क्योंकि आंवला में विटामिन सी की मात्रा ज्यादा होता है ,जिसके कारण ये ब्लड को सर्कुलेट करता ,और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है।

. आधा चमच शहद में एक चुटकी इल्याची पाउडर और थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर ,दिन में दो से तीन बार सेवन करने से खांसी में काफी आराम मिलता है।

.लहसुन(Garlic)को घी में भूनकर गरमा गरम खाने से भी खांसी में काफी राहत मिलता है।

.अगर खांसी(cough) बहुत ज्यादा है ,और बार- बार होता है तो अदरक का रस और शहद(Honey) को मिक्स करके इस्तेमाल करने से खांसी में काफी राहत मिलता है।

.अनार का रस भी खांसी(cough) में काफी फायदमंद होता है,लेकिन ये सिर्फ अकेला काम नहीं करता है इसमें ,थोड़ा सा पीपली का पाउडर और अदरक का रस मिलना होता है।

.अगर खांसने पर बलगम ज्यादा आता है,तो काली मिर्च को घी में मिलाकर लेने से बहुत ही ज्यादा फायदा होता  है।

. अगर खांसी करने के समय आपको गले में दर्द होता है तो एक अदरक के टुकड़े पर थोड़ा सा नमक लगाकर खाने से , गले के दर्द में काफी राहत मिलता है।

इन सब में से किसी भी नुस्खे को आप आजमा 

धन्यवाद

फटी हुई एड़ियों का घरेलू उपचार (crack heal solution)

एड़ियों का फटना (crack heel) स्त्री और पुरुषों दोनों में देखने को मिलता है।यह समस्या वैसे तो हर किसी भी मौसम में हो सकता है,लेकिन सर्दी में एड़ियों (Heel)
 का फटना ज्यादा होता है।लोग अक्सर अपने चेहरे पर
 तो ध्यान देते है,लेकिन एड़ियों की देखभाल ठीक से नहीं
 करते है,जिसके कारण Heel  ज्यादा फटती है।अगर स्त्रियों की Heel crack हो तो सैंडल पहनना मुश्किल हो जाता है, कई लोगो को उसमे दर्द होता है, कभी कभी खून भी निकलता है,और देखने में भी काफी बेकार लगता है। तो हम कुछ घरलू नुस्खे के बारे में बात करते है, जिसके इस्तेमाल से आप अपनी Crack  हुई एड़ियों का इलाज़ घर पर कर सकते है,बिना किसी नुकसान के और कम खर्च में।

१. नारियल तेल( coconut oil)

नारियल तेल के इस्तेमाल से crack हुई एड़ियों को काफी राहत मिलता है।अगर आप क्रैक हुई एड़ियों से परेशान है, तो एक चमच नारियल तेल को गर्म करके प्रभावित स्थान पर हल्के- हल्के मालिश करे और सुबह गर्म पानी से धो ले ,इसी तरह आपको १० से १५ दिन तक करना है,तो आप देखेंगे कि आपकी जो Heel crack हुई है ,वो सुंदर ,कोमल और मुलायम हो जाएंगे।


२. गुलाब जल और ग्लिसरीन। (Rose water and Glycerin)


Crack Heel  ठीक करने में गुलाब जल और ग्लिसरीन काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए आपको  गुलाब जल और ग्लिसरीन लेनी है ,जो आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाएगा , दोनों को समान मात्रा में ले कर मिक्स कर ले और अपनी क्रैक हुई  एड़ियों पर रात में मालिश कर ले , और सुबह उसे गुनगुने पानी से धो ले , इस तरह २ से ३ सप्ताह लगा ले, आपकी समस्या बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगी।

३. शहद (Honey)

शहद के इस्तेमाल से भी Crack Heel  में काफी फायदा होता है।इसके लिए आपको एक बर्तन में गुनगुने पानी रख ले, जहां तक आपका पैर उसमे डूब जाए और उसमे  एक चमच शहद डाल लें,  उसके बाद पैर को कम से कम १५ मिनट तक रखें । यह प्रक्रिया आपको २ सप्ताह  तक करनी है, फिर आप देखेंगे की आपकी क्रैक हुई Heekबिल्कुल सुंदर और मुलायम हो जाएगा।

इस तरह आप इन कुछ घरेलू नुस्खे को आजमा कर अपनी क्रैक हुई एड़ियों को ठीक कर सकते है।

आपको ये पोस्ट कैसा लगा कॉमेंट में जरूर बताएं ।

धन्यवाद

टेटनस क्या है ,इसका इलाज और बचाव ( Know about Tetnus)

 टिटनस (Tetanus in Hindi) एक खतरनाक बीमारी मानी जाती है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के कारण उत्पन्न होता है। टिटनेस जिस बैक्टीरिया से उत्पन्न होत...