गिलोय के चमत्कारी फायदे!

 आयुर्वेद में कड़वे स्वाद वाली गिलोय को कई बीमारियों के इलाज में कारगर जड़ी-बूटी माना गया है। आमतौर पर गिलोय को जूस, काढ़ा, पावडर या गिलोय वटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।



बढ़ाए रोग प्रतिरोधक क्षमता


इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट तत्व शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल देते हैं, खून को साफ करते हैं और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। गिलोय की 4-6 इंच लंबी डंडी को छील लें और आधा पानी मिलाकर मिक्सी में पीस लें। छान कर एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं।


सर्दी-जुकाम-बुखार भगाए


इस मौसम में होने वाले डेंगू, मलेरिया जैसे बुखार के कारण ब्लड प्लेटलेट्स कम होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर गिलोय का सेवन मददगार है। एक कप पानी में 4-5 इंच लंबी गिलोय की डंडी कूट कर डालें। पानी आधा रह जाने पर बने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है। प्लेटलेट्स कम होने पर गिलोय और ऐलोवेरा के रस को मिलाकर सेवन करना असरदार है।


सर्दी-जुकाम में भी गिलोय का काढ़ा पीने से आराम मिलता है। 6 इंच लंबी गिलोय की डंडी पीस कर पानी मिलाकर काढ़ा बनाएं। पिसी काली मिर्च डाल कर पिएं।


टाइप 2 डायबिटीज में असरदार


हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट होने के कारण गिलोय ब्लड शुगर लेवल को कम करती है। लौंग, अदरक, तुलसी मिलाकर बने गिलोय का काढ़ा पिएं।


अस्थमा में दे आराम


आजकल के बदलते मौसम और सर्दियों में अस्थमा के मरीजों के लिए गिलोय फायदेमंद है। नियमित रूप से गिलोय की डंडी चबाएं या उसका जूस पिएं।


आर्थराइटिस के दर्द में राहत


गिलोय का पावडर दूध के साथ 2-3 बार सेवन करने से गठिया में लाभ मिलता है। 1 चम्मच गिलोय का रस और त्रिफला को आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पिएं। रस में अदरक का रस भी मिला सकते हैं। एक चम्मच गिलोय के चूर्ण को घी के साथ लें। अरंडी या कैस्टर ऑयल के साथ मिलाकर जोड़ों पर लगाएं।


पाचन समस्याओं को करे दूर


इसके नियमित सेवन से पाचन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। कब्ज जैसी पेट की बीमारी में राहत मिलती है। कब्ज होने पर एक-चौथाई कप गिलोय के रस में गुड़ मिलाकर पिएं।


एनिमिया में प्रभावी


गिलोय खून की कमी के कारण लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ाने में सहायक है। जिससे एनीमिया और उससे होने वाली थकान-कमजोरी दूर होती है। रोजाना सुबह-शाम गिलोय का रस घी, मिश्री या शहद में मिलाकर लें।


पीलिया होने पर एक चम्मच गिलोय का चूर्ण, काली मिर्च या त्रिफला के एक चम्मच चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर चाटना लाभकारी है। गिलोय के एक चम्मच ताजा रस को एक गिलास लस्सी में मिलाकर पिएं।


कम करती है तनाव


गिलोय एस्ट्रोजन का काम करती है और मानसिक तनाव या एंग्जाइटी के स्तर को कम करती है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली दुरुस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।


मोटापा करे नियंत्रित


गिलोय शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है और शरीर में अतिरिक्त फैट कम होता है। एक चम्मच गिलोय और त्रिफला पावडर सुबह-शाम शहद के साथ लें। दिन में एक बार गिलोय, हरड़, बहेड़, शिलाजीत और आंवला मिलाकर काढ़ा पिएं।


त्वचा-बालों को रखे स्वस्थ


एंटी एजिंग गुणों के कारण गिलोय के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है, दाग-धब्बे दूर होते हैं। गिलोय की पत्तियों को पीस कर बने पेस्ट में अरंडी या नीम का थोड़ा-सा तेल गर्म करके मिलाएं। गिलोय का तेल थोड़े-से दूध में मिलाकर हल्का गर्म करें। इसे फटी त्वचा पर लगाने से त्वचा कोमल और साफ हो जाती है। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं। बालों में रुसी, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की समस्याएं दूर होती हैं।

6 comments:

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